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  • Rath Yatra 2025: रांची में 27 जून से ऐतिहासिक मेला शुरू, 1500 से अधिक दुकानें होंगी आकर्षण का केंद्र

    Rath Yatra 2025: रांची में 27 जून से ऐतिहासिक मेला शुरू, 1500 से अधिक दुकानें होंगी आकर्षण का केंद्र

    Rath Yatra 2025: राजधानी रांची में 27 जून 2025 से ऐतिहासिक रथ यात्रा मेले की शुरुआत होने जा रही है। इस पावन अवसर को लेकर मेला परिसर में तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। पूरा क्षेत्र रोशनी से जगमगा रहा है और हर तरफ उत्साह का माहौल है। मेले में दूर-दूर से दुकानदार पहुंच चुके हैं और दुकानें सजने लगी हैं।

    1500 से अधिक दुकानें होंगी आकर्षण का केंद्र

    इस वर्ष मेले में 1500 से भी अधिक दुकानों की व्यवस्था की गई है। इनमें पारंपरिक मिठाइयों की दुकानें, कृषि उपकरण, मीना बाजार, हस्तशिल्प, खिलौने, कपड़े, आभूषण, और खाने-पीने के स्टॉल शामिल हैं। साथ ही “मौत का कुआं” और अन्य आकर्षक स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र होंगे।

    20 बड़े झूले, रोमांचक अनुभव की तैयारी
    मेले का सबसे बड़ा आकर्षण रोमांचक झूले हैं। इस बार परिसर में 20 बड़े झूले लगाये जा रहे हैं, जिनमें फ्रिसबी झूला (नाव जैसा आकार), डांसिंग फ्लाइ, ड्रैगन ट्रेन, टोरा-टोरा, चांद तारा, ब्रेक डांस, सुनामी, रेंजर और बड़ा नाव जैसे झूले प्रमुख हैं। इन झूलों में से 10 की फिटिंग पहले ही पूरी कर ली गई है, बाकी का काम अंतिम चरण में है।

    बच्चों के लिए विशेष झूलों की व्यवस्था

    बच्चों के लिए 20 से अधिक छोटे झूले लगाये जा रहे हैं। इनमें स्कॉर्पियो, हेलिकॉप्टर, मिक्की माउस, टावर झूला, श्री-वन झूला, बेबी ट्रेन, और सुनमुन ट्रेन जैसे नाम शामिल हैं। इन झूलों की टिकट कीमत 50 से 80 रुपये के बीच रखी गई है, जबकि बड़े झूलों के लिए दर्शकों को 50 से 100 रुपये तक खर्च करने होंगे।

    मौत के कुएं के करतब भी होंगे आकर्षण का केंद्र

    मेले में इस बार दो “मौत के कुएं” लगाये जा रहे हैं, जहां बाइक और कार चालकों द्वारा हैरतअंगेज करतब दिखाये जाएंगे। इनकी फिटिंग और संरचना लगभग पूरी हो चुकी है।

    रांची से लेकर कोलकाता तक से पहुंचे झूला संचालक

    इस भव्य आयोजन के लिए रांची, गुमला, सिसई, जमशेदपुर, पटना, बिहार शरीफ और कोलकाता से झूला संचालक पहुंचे हैं। रांची के प्रसिद्ध झूला संचालक कुतुबुद्दीन भाई ने बताया कि वह पिछले 25 वर्षों से इस मेले में भाग ले रहे हैं और इस बार कुछ नया लेकर आए हैं। कोलकाता से आए मेरून दास ने भी मेले से जुड़ी वर्षों पुरानी यादें साझा कीं और तैयारियों को अंतिम रूप देने की बात कही।


    रथ यात्रा मेला 2025 रांची के लोगों के लिए न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि मनोरंजन और खरीदारी का भी एक बड़ा अवसर है। झूले, दुकानें, खानपान और लोककला से भरपूर यह मेला हर वर्ग के लोगों को एक साथ लाकर पारंपरिक संस्कृति और आधुनिक आनंद का समागम प्रस्तुत करता है।

  • Rath Yatra 2025: रांची में 27 जून से ऐतिहासिक मेला शुरू, 1500 से अधिक दुकानें होंगी आकर्षण का केंद्र

    Rath Yatra 2025: रांची में 27 जून से ऐतिहासिक मेला शुरू, 1500 से अधिक दुकानें होंगी आकर्षण का केंद्र

    Rath Yatra 2025: राजधानी रांची में 27 जून 2025 से ऐतिहासिक रथ यात्रा मेले की शुरुआत होने जा रही है। इस पावन अवसर को लेकर मेला परिसर में तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। पूरा क्षेत्र रोशनी से जगमगा रहा है और हर तरफ उत्साह का माहौल है। मेले में दूर-दूर से दुकानदार पहुंच चुके हैं और दुकानें सजने लगी हैं।

    1500 से अधिक दुकानें होंगी आकर्षण का केंद्र

    इस वर्ष मेले में 1500 से भी अधिक दुकानों की व्यवस्था की गई है। इनमें पारंपरिक मिठाइयों की दुकानें, कृषि उपकरण, मीना बाजार, हस्तशिल्प, खिलौने, कपड़े, आभूषण, और खाने-पीने के स्टॉल शामिल हैं। साथ ही “मौत का कुआं” और अन्य आकर्षक स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र होंगे।

    20 बड़े झूले, रोमांचक अनुभव की तैयारी
    मेले का सबसे बड़ा आकर्षण रोमांचक झूले हैं। इस बार परिसर में 20 बड़े झूले लगाये जा रहे हैं, जिनमें फ्रिसबी झूला (नाव जैसा आकार), डांसिंग फ्लाइ, ड्रैगन ट्रेन, टोरा-टोरा, चांद तारा, ब्रेक डांस, सुनामी, रेंजर और बड़ा नाव जैसे झूले प्रमुख हैं। इन झूलों में से 10 की फिटिंग पहले ही पूरी कर ली गई है, बाकी का काम अंतिम चरण में है।

    बच्चों के लिए विशेष झूलों की व्यवस्था

    बच्चों के लिए 20 से अधिक छोटे झूले लगाये जा रहे हैं। इनमें स्कॉर्पियो, हेलिकॉप्टर, मिक्की माउस, टावर झूला, श्री-वन झूला, बेबी ट्रेन, और सुनमुन ट्रेन जैसे नाम शामिल हैं। इन झूलों की टिकट कीमत 50 से 80 रुपये के बीच रखी गई है, जबकि बड़े झूलों के लिए दर्शकों को 50 से 100 रुपये तक खर्च करने होंगे।

    मौत के कुएं के करतब भी होंगे आकर्षण का केंद्र

    मेले में इस बार दो “मौत के कुएं” लगाये जा रहे हैं, जहां बाइक और कार चालकों द्वारा हैरतअंगेज करतब दिखाये जाएंगे। इनकी फिटिंग और संरचना लगभग पूरी हो चुकी है।

    रांची से लेकर कोलकाता तक से पहुंचे झूला संचालक

    इस भव्य आयोजन के लिए रांची, गुमला, सिसई, जमशेदपुर, पटना, बिहार शरीफ और कोलकाता से झूला संचालक पहुंचे हैं। रांची के प्रसिद्ध झूला संचालक कुतुबुद्दीन भाई ने बताया कि वह पिछले 25 वर्षों से इस मेले में भाग ले रहे हैं और इस बार कुछ नया लेकर आए हैं। कोलकाता से आए मेरून दास ने भी मेले से जुड़ी वर्षों पुरानी यादें साझा कीं और तैयारियों को अंतिम रूप देने की बात कही।


    रथ यात्रा मेला 2025 रांची के लोगों के लिए न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि मनोरंजन और खरीदारी का भी एक बड़ा अवसर है। झूले, दुकानें, खानपान और लोककला से भरपूर यह मेला हर वर्ग के लोगों को एक साथ लाकर पारंपरिक संस्कृति और आधुनिक आनंद का समागम प्रस्तुत करता है।

  • Malasana Benefits: Yoga एक्सपर्ट्स के अनुसार मलासन करने के अद्भुत फायदे, जानें करने का सही तरीका

    Malasana Benefits: Yoga एक्सपर्ट्स के अनुसार मलासन करने के अद्भुत फायदे, जानें करने का सही तरीका

    Malasana Benefits: योग केवल शरीर को लचीला और संतुलित नहीं बनाता, बल्कि आंतरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है। इसी कारण हेल्थ एक्सपर्ट रोज़ाना योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं। कुछ विशेष योगासन ऐसे होते हैं जिनका नियमित अभ्यास शरीर और मन दोनों पर गहरा प्रभाव डालता है। इन्हीं में से एक है मलासन (Malasana)। आइए जानते हैं मलासन करने से क्या-क्या फायदे होते हैं और इसे कैसे सही तरीके से किया जाए।


    मलासन क्या है?

    मलासन को इंग्लिश में Garland Pose भी कहा जाता है। यह एक स्क्वाटिंग पोजिशन है जिसमें व्यक्ति दोनों पैरों को फैलाकर ज़मीन पर बैठता है और हाथों को नमस्ते की मुद्रा में जोड़ता है। यह आसन दिखने में भले ही आसान लगे, लेकिन इसके फायदे गहराई से शरीर पर असर डालते हैं।


    मलासन करने से क्या होता है?

    योग कोच तनु ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने 1 महीने तक रोज सुबह मलासन में बैठकर गर्म पानी पिया। इस छोटे से अभ्यास ने उनके शरीर पर कई सकारात्मक बदलाव किए।

    पाचन में सुधार

    तनु बताती हैं कि इस आदत से उनकी कब्ज की समस्या पूरी तरह खत्म हो गई और उनका बॉवेल मूवमेंट नियमित हो गया। सुबह उठते ही मलासन में बैठकर हल्का गर्म पानी पीने से आंतरिक सफाई बेहतर होती है।

    पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं में राहत

    महिलाओं के लिए यह योगासन खास तौर पर फायदेमंद है। तनु बताती हैं कि उनका पीरियड्स साइकल पहले से ज्यादा नियमित हो गया और पीरियड्स के दौरान दर्द में भी कमी आई।

    मॉर्निंग नेशिया और एनर्जी लेवल

    मलासन से सुबह-सुबह होने वाली मिचली जैसी समस्या दूर हो गई। इसके अलावा वे अब पूरे दिन ज़्यादा एक्टिव और मेंटली स्टेबल महसूस करती हैं।

    हिप्स और बॉडी मोबिलिटी

    मलासन से हिप्स की मोबिलिटी बढ़ती है जिससे लंबे समय तक बैठना या खड़े रहना आसान हो जाता है। साथ ही गर्म पानी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।


    मलासन कैसे करें?

    1. सीधे खड़े हों और पैरों को कंधे की चौड़ाई जितना फैलाएं।

    2. धीरे-धीरे स्क्वाट पोज़िशन में बैठें।

    3. कोहनियों को घुटनों के अंदर रखें और हाथ जोड़कर नमस्ते की मुद्रा बनाएं।

    4. रीढ़ को सीधा रखें और कुछ देर इसी पोज़िशन में रहें।

    5. इस दौरान हल्का गर्म पानी धीरे-धीरे पिएं।

    अगर आप भी अपनी सुबह की शुरुआत एक हेल्दी और असरदार तरीके से करना चाहते हैं, तो मलासन में बैठकर गर्म पानी पीना एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह न सिर्फ पाचन को बेहतर बनाता है, बल्कि शरीर को डिटॉक्स कर एनर्जी भी देता है।

    अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

  • Malasana Benefits: Yoga एक्सपर्ट्स के अनुसार मलासन करने के अद्भुत फायदे, जानें करने का सही तरीका

    Malasana Benefits: Yoga एक्सपर्ट्स के अनुसार मलासन करने के अद्भुत फायदे, जानें करने का सही तरीका

    Malasana Benefits: योग केवल शरीर को लचीला और संतुलित नहीं बनाता, बल्कि आंतरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है। इसी कारण हेल्थ एक्सपर्ट रोज़ाना योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की सलाह देते हैं। कुछ विशेष योगासन ऐसे होते हैं जिनका नियमित अभ्यास शरीर और मन दोनों पर गहरा प्रभाव डालता है। इन्हीं में से एक है मलासन (Malasana)। आइए जानते हैं मलासन करने से क्या-क्या फायदे होते हैं और इसे कैसे सही तरीके से किया जाए।


    मलासन क्या है?

    मलासन को इंग्लिश में Garland Pose भी कहा जाता है। यह एक स्क्वाटिंग पोजिशन है जिसमें व्यक्ति दोनों पैरों को फैलाकर ज़मीन पर बैठता है और हाथों को नमस्ते की मुद्रा में जोड़ता है। यह आसन दिखने में भले ही आसान लगे, लेकिन इसके फायदे गहराई से शरीर पर असर डालते हैं।


    मलासन करने से क्या होता है?

    योग कोच तनु ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने 1 महीने तक रोज सुबह मलासन में बैठकर गर्म पानी पिया। इस छोटे से अभ्यास ने उनके शरीर पर कई सकारात्मक बदलाव किए।

    पाचन में सुधार

    तनु बताती हैं कि इस आदत से उनकी कब्ज की समस्या पूरी तरह खत्म हो गई और उनका बॉवेल मूवमेंट नियमित हो गया। सुबह उठते ही मलासन में बैठकर हल्का गर्म पानी पीने से आंतरिक सफाई बेहतर होती है।

    पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं में राहत

    महिलाओं के लिए यह योगासन खास तौर पर फायदेमंद है। तनु बताती हैं कि उनका पीरियड्स साइकल पहले से ज्यादा नियमित हो गया और पीरियड्स के दौरान दर्द में भी कमी आई।

    मॉर्निंग नेशिया और एनर्जी लेवल

    मलासन से सुबह-सुबह होने वाली मिचली जैसी समस्या दूर हो गई। इसके अलावा वे अब पूरे दिन ज़्यादा एक्टिव और मेंटली स्टेबल महसूस करती हैं।

    हिप्स और बॉडी मोबिलिटी

    मलासन से हिप्स की मोबिलिटी बढ़ती है जिससे लंबे समय तक बैठना या खड़े रहना आसान हो जाता है। साथ ही गर्म पानी शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।


    मलासन कैसे करें?

    1. सीधे खड़े हों और पैरों को कंधे की चौड़ाई जितना फैलाएं।

    2. धीरे-धीरे स्क्वाट पोज़िशन में बैठें।

    3. कोहनियों को घुटनों के अंदर रखें और हाथ जोड़कर नमस्ते की मुद्रा बनाएं।

    4. रीढ़ को सीधा रखें और कुछ देर इसी पोज़िशन में रहें।

    5. इस दौरान हल्का गर्म पानी धीरे-धीरे पिएं।

    अगर आप भी अपनी सुबह की शुरुआत एक हेल्दी और असरदार तरीके से करना चाहते हैं, तो मलासन में बैठकर गर्म पानी पीना एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यह न सिर्फ पाचन को बेहतर बनाता है, बल्कि शरीर को डिटॉक्स कर एनर्जी भी देता है।

    अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के लिए डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

  • Labubu Doll Trend: डरावनी और शैतानी स्माइल वाली गुड़िया बनी फैशन का हिस्सा

    Labubu Doll Trend: डरावनी और शैतानी स्माइल वाली गुड़िया बनी फैशन का हिस्सा

     Labubu Doll Trend: इन दिनों सोशल मीडिया पर एक अनोखी और डरावनी दिखने वाली गुड़िया लोगों के बीच जबरदस्त वायरल हो रही है, जिसका नाम है लाबुबू (Labubu)। इसकी बड़ी-बड़ी आंखें, नुकीले दांत और शैतानी स्माइल इसे एक अलग ही रूप देती है। देखने में जितनी डरावनी लगती है, उतनी ही प्यारी और स्टाइलिश भी मानी जाती है। लोग इसे बैग में कीचेन, शोपीस और यहां तक कि कलेक्टिबल आइटम के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

    क्या है Labubu डॉल की कहानी?

    Labubu असल में एक
    काल्पनिक कैरेक्टर है जिसे हांगकांग के कलाकार Kasing Lung ने साल 2015 में बनाया था। इसकी प्रेरणा नॉर्डिक फेयरी टेल्स यानी उत्तरी यूरोप की परियों की कहानियों से ली गई है। यह डॉल एक पॉप आर्ट कैरेक्टर की तरह दिखती है, जिसमें मासूमियत और शैतानी दोनों का अनोखा मिश्रण है।

    कैसे बनी यह डॉल पॉपुलर?

    Labubu
    की लोकप्रियता तब बढ़ी जब चीन की कंपनी Pop Mart ने इसे 2019 में ‘ब्लाइंड बॉक्स’ फॉर्मेट में लॉन्च किया। इस फॉर्मेट में लोग बिना यह जाने कि अंदर कौन-सी डॉल है, एक बॉक्स खरीदते हैं। यह एक लकी ड्रॉ की तरह होता है, जिसमें लोग तब तक खरीदते रहते हैं जब तक उन्हें अपनी पसंद की डॉल नहीं मिल जाती। यही सस्पेंस और उत्साह Labubu को कलेक्टर्स के बीच सुपरहिट बना देता है।

    क्यों बन रही है फैशन ट्रेंड?

    Labubu डॉल को कई
    इंटरनेशनल सेलेब्रिटीज का सपोर्ट मिला है। K-Pop स्टार Lisa (Blackpink) ने इसके साथ फोटो शेयर की थी, जिसके बाद से रिहाना, दुआ लीपा, और अनन्या पांडे जैसी हस्तियां भी इसके साथ नजर आ चुकी हैं। इससे इसकी फैशन वैल्यू और बढ़ गई है।

    कुछ लोग इसे इंवेस्टमेंट आइटम की तरह भी खरीद रहे हैं, क्योंकि इसके लिमिटेड एडिशन वर्जन की कीमतें समय के साथ कई गुना बढ़ रही हैं।

    लाबुबू डॉल की कीमत जानकर चौंक जाएंगे

    हाल ही में
    बीजिंग में एक 131 सेंटीमीटर ऊंची लाबुबू डॉल की नीलामी 1.08 मिलियन युआन यानी करीब 1.2 करोड़ रुपये में हुई। इसके छोटे वर्जन भी लाखों रुपये में बिक रहे हैं।


    लाबुबू डॉल सिर्फ एक खिलौना नहीं, बल्कि एक कला, फैशन और कलेक्शन का प्रतीक बन चुकी है। डरावनी लेकिन प्यारी दिखने वाली यह डॉल आज युवाओं की पसंदीदा स्टाइल स्टेटमेंट बन गई है।

  • Labubu Doll Trend: डरावनी और शैतानी स्माइल वाली गुड़िया बनी फैशन का हिस्सा

    Labubu Doll Trend: डरावनी और शैतानी स्माइल वाली गुड़िया बनी फैशन का हिस्सा

     Labubu Doll Trend: इन दिनों सोशल मीडिया पर एक अनोखी और डरावनी दिखने वाली गुड़िया लोगों के बीच जबरदस्त वायरल हो रही है, जिसका नाम है लाबुबू (Labubu)। इसकी बड़ी-बड़ी आंखें, नुकीले दांत और शैतानी स्माइल इसे एक अलग ही रूप देती है। देखने में जितनी डरावनी लगती है, उतनी ही प्यारी और स्टाइलिश भी मानी जाती है। लोग इसे बैग में कीचेन, शोपीस और यहां तक कि कलेक्टिबल आइटम के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

    क्या है Labubu डॉल की कहानी?

    Labubu असल में एक
    काल्पनिक कैरेक्टर है जिसे हांगकांग के कलाकार Kasing Lung ने साल 2015 में बनाया था। इसकी प्रेरणा नॉर्डिक फेयरी टेल्स यानी उत्तरी यूरोप की परियों की कहानियों से ली गई है। यह डॉल एक पॉप आर्ट कैरेक्टर की तरह दिखती है, जिसमें मासूमियत और शैतानी दोनों का अनोखा मिश्रण है।

    कैसे बनी यह डॉल पॉपुलर?

    Labubu
    की लोकप्रियता तब बढ़ी जब चीन की कंपनी Pop Mart ने इसे 2019 में ‘ब्लाइंड बॉक्स’ फॉर्मेट में लॉन्च किया। इस फॉर्मेट में लोग बिना यह जाने कि अंदर कौन-सी डॉल है, एक बॉक्स खरीदते हैं। यह एक लकी ड्रॉ की तरह होता है, जिसमें लोग तब तक खरीदते रहते हैं जब तक उन्हें अपनी पसंद की डॉल नहीं मिल जाती। यही सस्पेंस और उत्साह Labubu को कलेक्टर्स के बीच सुपरहिट बना देता है।

    क्यों बन रही है फैशन ट्रेंड?

    Labubu डॉल को कई
    इंटरनेशनल सेलेब्रिटीज का सपोर्ट मिला है। K-Pop स्टार Lisa (Blackpink) ने इसके साथ फोटो शेयर की थी, जिसके बाद से रिहाना, दुआ लीपा, और अनन्या पांडे जैसी हस्तियां भी इसके साथ नजर आ चुकी हैं। इससे इसकी फैशन वैल्यू और बढ़ गई है।

    कुछ लोग इसे इंवेस्टमेंट आइटम की तरह भी खरीद रहे हैं, क्योंकि इसके लिमिटेड एडिशन वर्जन की कीमतें समय के साथ कई गुना बढ़ रही हैं।

    लाबुबू डॉल की कीमत जानकर चौंक जाएंगे

    हाल ही में
    बीजिंग में एक 131 सेंटीमीटर ऊंची लाबुबू डॉल की नीलामी 1.08 मिलियन युआन यानी करीब 1.2 करोड़ रुपये में हुई। इसके छोटे वर्जन भी लाखों रुपये में बिक रहे हैं।


    लाबुबू डॉल सिर्फ एक खिलौना नहीं, बल्कि एक कला, फैशन और कलेक्शन का प्रतीक बन चुकी है। डरावनी लेकिन प्यारी दिखने वाली यह डॉल आज युवाओं की पसंदीदा स्टाइल स्टेटमेंट बन गई है।

  • नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान, दोपहिया वाहनों से नहीं लिया जाएगा टोल टैक्स

    नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान, दोपहिया वाहनों से नहीं लिया जाएगा टोल टैक्स

    Toll Tax Rule: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि दोपहिया वाहनों से टोल टैक्स वसूलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि टोल पर दोपहिया वाहनों को पहले की तरह पूरी तरह से छूट मिलती रहेगी। गडकरी के बयान से उन लाखों दोपहिया वाहन चालकों को राहत मिली है जो रोज़ाना टोल प्लाज़ा से गुजरते हैं।

    दरअसल, जब कोई ग्राहक नया दोपहिया वाहन खरीदता है, तभी वाहन की कीमत में ही एक बार का टोल टैक्स शामिल कर लिया जाता है। ऐसे में अलग से टोल वसूलने की कोई आवश्यकता नहीं होती। यही कारण है कि राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways) पर चलने वाले दोपहिया वाहनों से टोल नहीं लिया जाता। यह सुविधा सिर्फ दोपहिया तक ही सीमित है, चार पहिया या उससे अधिक श्रेणी के वाहनों से टोल वसूला जाता है


    गडकरी का नया ऐलान: वार्षिक टोल पास योजना
    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में टोल भुगतान को आसान और सुविधाजनक बनाने के लिए एक नई योजना की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2025 से पूरे देश में फास्टैग आधारित वार्षिक टोल पास योजना शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत वाहन मालिक 3000 रुपये में एक वार्षिक पास प्राप्त कर सकेंगे, जिसकी मदद से वे 200 बार टोल प्लाजा पार कर सकेंगे। यह योजना फिलहाल NHAI और पूर्वोत्तर राज्यों के टोल प्लाज़ा पर लागू होगी, लेकिन राज्य राजमार्गों पर यह मान्य नहीं होगी।

    इस योजना के अंतर्गत एक वाहन मालिक 3000 रुपये का वार्षिक पास खरीद सकता है, जिसकी मदद से वह 200 बार टोल प्लाज़ा पार कर सकेगा। यह सुविधा फिलहाल केवल राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और पूर्वोत्तर राज्यों (NE) के टोल प्लाज़ा पर ही लागू होगी। राज्य राजमार्गों (State Highways) पर स्थित टोल बूथ पर यह पास मान्य नहीं होगा।


    इस योजना के लाभ

    गडकरी ने बताया कि यह योजना
    60 किलोमीटर के दायरे में टोल प्लाज़ा से जुड़े विवादों और परेशानी को कम करेगी। इससे टोल भुगतान एकल और किफायती हो जाएगा। इसके अलावा, प्रतीक्षा समय में कमी, भीड़भाड़ में राहत और टोल प्लाज़ा पर होने वाले विवादों में कमी आएगी।

    इस योजना का मुख्य उद्देश्य है कि लाखों निजी वाहन चालकों को तेज़, सुगम और परेशानी-मुक्त यात्रा का अनुभव मिल सके। यह पहल डिजिटल इंडिया और स्मार्ट ट्रैवल सिस्टम की ओर एक और बड़ा कदम मानी जा रही है।

  • नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान, दोपहिया वाहनों से नहीं लिया जाएगा टोल टैक्स

    नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान, दोपहिया वाहनों से नहीं लिया जाएगा टोल टैक्स

    Toll Tax Rule: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि दोपहिया वाहनों से टोल टैक्स वसूलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा कि टोल पर दोपहिया वाहनों को पहले की तरह पूरी तरह से छूट मिलती रहेगी। गडकरी के बयान से उन लाखों दोपहिया वाहन चालकों को राहत मिली है जो रोज़ाना टोल प्लाज़ा से गुजरते हैं।

    दरअसल, जब कोई ग्राहक नया दोपहिया वाहन खरीदता है, तभी वाहन की कीमत में ही एक बार का टोल टैक्स शामिल कर लिया जाता है। ऐसे में अलग से टोल वसूलने की कोई आवश्यकता नहीं होती। यही कारण है कि राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways) पर चलने वाले दोपहिया वाहनों से टोल नहीं लिया जाता। यह सुविधा सिर्फ दोपहिया तक ही सीमित है, चार पहिया या उससे अधिक श्रेणी के वाहनों से टोल वसूला जाता है


    गडकरी का नया ऐलान: वार्षिक टोल पास योजना
    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में टोल भुगतान को आसान और सुविधाजनक बनाने के लिए एक नई योजना की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2025 से पूरे देश में फास्टैग आधारित वार्षिक टोल पास योजना शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत वाहन मालिक 3000 रुपये में एक वार्षिक पास प्राप्त कर सकेंगे, जिसकी मदद से वे 200 बार टोल प्लाजा पार कर सकेंगे। यह योजना फिलहाल NHAI और पूर्वोत्तर राज्यों के टोल प्लाज़ा पर लागू होगी, लेकिन राज्य राजमार्गों पर यह मान्य नहीं होगी।

    इस योजना के अंतर्गत एक वाहन मालिक 3000 रुपये का वार्षिक पास खरीद सकता है, जिसकी मदद से वह 200 बार टोल प्लाज़ा पार कर सकेगा। यह सुविधा फिलहाल केवल राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और पूर्वोत्तर राज्यों (NE) के टोल प्लाज़ा पर ही लागू होगी। राज्य राजमार्गों (State Highways) पर स्थित टोल बूथ पर यह पास मान्य नहीं होगा।


    इस योजना के लाभ

    गडकरी ने बताया कि यह योजना
    60 किलोमीटर के दायरे में टोल प्लाज़ा से जुड़े विवादों और परेशानी को कम करेगी। इससे टोल भुगतान एकल और किफायती हो जाएगा। इसके अलावा, प्रतीक्षा समय में कमी, भीड़भाड़ में राहत और टोल प्लाज़ा पर होने वाले विवादों में कमी आएगी।

    इस योजना का मुख्य उद्देश्य है कि लाखों निजी वाहन चालकों को तेज़, सुगम और परेशानी-मुक्त यात्रा का अनुभव मिल सके। यह पहल डिजिटल इंडिया और स्मार्ट ट्रैवल सिस्टम की ओर एक और बड़ा कदम मानी जा रही है।

  • Bihar Teacher Transfer 2025: बिहार में  शिक्षकों को मिली बड़ी राहत, अब खुद कर सकेंगे स्कूल का चयन

    Bihar Teacher Transfer 2025: बिहार में शिक्षकों को मिली बड़ी राहत, अब खुद कर सकेंगे स्कूल का चयन


    Bihar Teacher Transfer 2025: बिहार सरकार ने राज्य के शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिससे हजारों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब राज्य के सभी स्तरों के शिक्षक स्वयं अपने स्थानांतरण की प्रक्रिया को पूरा कर सकेंगे और अपनी पसंद के विद्यालय का चयन कर सकेंगे। यह कदम शिक्षकों की असंतुष्टि और विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए उठाया गया है। सरकार ने म्यूचुअल ट्रांसफर (पारस्परिक स्थानांतरण) की सुविधा भी प्रदान की है।

    म्यूचुअल ट्रांसफर की नई व्यवस्था
    नई व्यवस्था के तहत एक जैसे विषय और श्रेणी (कैटेगरी) के शिक्षक अधिकतम 10 शिक्षकों का समूह बनाकर आपसी सहमति से विद्यालयों का चयन कर सकेंगे। उदाहरण के लिए, गणित विषय के सभी शिक्षक आपस में समूह बनाकर स्थानांतरण कर सकते हैं। इस समूह में सभी शिक्षक एक ही कैटेगरी के होंगे जैसे – नियमित से नियमित, विशिष्ट शिक्षक से विशिष्ट शिक्षक या विद्यालय शिक्षक से विद्यालय शिक्षक। यह स्थानांतरण केवल उन्हीं विद्यालयों के बीच किया जाएगा, जहां शिक्षक वर्तमान में पदस्थापित हैं।

    स्थानांतरण प्रक्रिया का विवरण
    शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश (Letter-No-46-C-Dated-26.06.2025) के अनुसार, शिक्षक स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। शिक्षक पोर्टल में लॉगिन कर अपने जिले में स्थानांतरण के इच्छुक अन्य शिक्षकों की सूची देख सकेंगे। वे पंचायत, प्रखंड, अनुमंडल या जिले स्तर पर अपने विषय और श्रेणी के शिक्षकों की सूची भी देख सकते हैं।

    सम्पर्क और सत्यापन प्रक्रिया
    जब शिक्षक किसी अन्य शिक्षक के साथ स्थानांतरण के लिए सहमत होंगे, तब वे OTP आधारित प्रणाली के माध्यम से उस शिक्षक का मोबाइल नंबर प्राप्त कर सकेंगे और आपसी बातचीत कर विद्यालय का चयन कर सकेंगे। OTP सत्यापन के तीन दिनों के भीतर स्थानांतरण आदेश जारी कर दिया जाएगा।

    नियम और शर्तें
    स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद संबंधित शिक्षक को 7 दिनों के भीतर नए विद्यालय में योगदान देना अनिवार्य होगा। यदि समूह में कोई भी शिक्षक योगदान से इनकार करता है, तो पूरे समूह का स्थानांतरण आदेश रद्द कर दिया जाएगा।

    यह निर्णय बिहार सरकार की एक सकारात्मक पहल है, जो शिक्षकों की समस्याओं को समझते हुए एक तकनीकी और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से समाधान प्रदान करती है। इससे न केवल शिक्षकों को संतुष्टि मिलेगी, बल्कि विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।